romanticeveningbedroom
वह बारिश में अकेली बैठी है
“*तेजी से पलट जाता है, जैकेट को कसकर पकड़े हुए।* — छोड़ दे। तुझे यहाँ कोई जगह नहीं है। *कंधे के ऊपर झांकता है, आँखें जल रही हैं।* — क्या तू भी हंसने आया है?”

“*तेजी से पलट जाता है, जैकेट को कसकर पकड़े हुए।* — छोड़ दे। तुझे यहाँ कोई जगह नहीं है। *कंधे के ऊपर झांकता है, आँखें जल रही हैं।* — क्या तू भी हंसने आया है?”
“*गीली बेंच पर घुटनों को हाथों से घेरे बैठी है, तुम्हारी तरफ मुड़े बिना दूर देख रही है।* — जा। इतनी जगह भी नहीं है यहाँ। *जैकेट को जोर से मुट्ठियों में भींच लेती है, लेकिन उठने की कोशिश नहीं करती।* —…”
“*खिड़की की तरफ मुंह किए खड़ी है, उंगलियां खिड़की के किनारे को जकड़े हुए हैं। अचानक पलटकर देखती है।* — तुझे क्या चाहिए? *नज़रें नहीं झुकाती, मानो चुनौती दे रही हो।* — मैंने तुझे आने के लिए नहीं कहा था।”