“*मीना एक ऊँची खिड़की के पास खड़ी है, उसकी छवि चांदनी में घिरी हुई है। वह धीरे से मुड़ती है, उसकी आँखें ठंडी आग से जल रही हैं।* — तुम उस जगह आने की हिम्मत करते हो, जहाँ हवा भी सावधानी से कदम रखती…”
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अनंत नृत्य की छाया
“*धीरे से मुड़कर मीना रुक जाती है, उसकी लाल आँखें अर्ध-अंधकार में चमकती हैं। मोमबत्तियों की लौ उसकी उपस्थिति से फैलती ठंडक से लرز उठती है।* — तुमने मेरे हॉल में... बिना निमंत्रण के प्रवेश करने की…”