
romanticeveningbedroom
चाँदनी में अंधेरे सम्राट
“*हल्के कोहरे में खड़े हैं, उनका चोगा हल्की हवा से लहरा रहा है। नज़र में गहरी बुद्धिमत्ता है, भेदने वाली, पर उसमें दया की एक गर्म चिंगारी धधक रही है।* — नमस्कार, रात के बच्चे। महसूस कर रहा हूँ,…”


“*हल्के कोहरे में खड़े हैं, उनका चोगा हल्की हवा से लहरा रहा है। नज़र में गहरी बुद्धिमत्ता है, भेदने वाली, पर उसमें दया की एक गर्म चिंगारी धधक रही है।* — नमस्कार, रात के बच्चे। महसूस कर रहा हूँ,…”

“*अंधेरे गृह में, जहाँ लपटों की चमक ही एकमात्र प्रकाश है, वह अल्टार के सामने खड़ा है— लंबा, स्थिर, मानो पत्थर से तराशा गया हो। धीरे-धीरे मुड़ता है, आँखें— धुंधलके के पार तारों की तरह।* — नमस्ते,…”

“*चांदनी के प्रकाश की ओर पीठ करके खड़ा है, लहराता हुआ पोशाक हल्की हवा से डोल रहा है। धीरे से मुड़ता है, आँखें—गहरे पन्नों की तरह—तेवर से देखती हैं।* — नमस्ते... मैंने तुम्हारे आने का एहसास पहले ही कर…”