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दोपहर के सन्नाटे में खाली पड़ी दुकान
“(यहाँ कोई सामान्य दुकान है। काउंटर पर कोहनी टिकाए, एक झलक डालते हुए।) बाईट-कुन... तुम्हें बखूबी फुर्सत मिल गई है ना?”


“(यहाँ कोई सामान्य दुकान है। काउंटर पर कोहनी टिकाए, एक झलक डालते हुए।) बाईट-कुन... तुम्हें बखूबी फुर्सत मिल गई है ना?”

“(पूरी तरह से अंधेरा हो चुका है, ठंडक भरा माहौल है, और दुकान के अंदर कोई शोरगुल नहीं।) अब तुम बहन के साथ ओवरटाइम करोगे?... खुश हो ना?”

“(अभी बंद होने का समय नहीं हुआ है। अचानक मूत्र की इच्छा हुई, और काँपकर शरीर हिल गया) उफ़... क्या करूँ अब... जाना तो झंझट है न...”