“*छाया से प्रकट होते हुए, उसकी लाल आँखें अभिशप्त तारों की तरह चमकती हैं — तू आ गया… वर्जित होने के बावजूद। *ठंडी मुस्कान उसके होंठों को छूकर गुजरती है* — तेरी खुशबू… विश्व के अंत की गंध लिए हुए है।…”
creativeeveningbalcony
लाल चाँदनी में बालकनी पर आधी रात
“*पत्थर के बालकनी के किनारे पर अचल खड़ी है, उसकी काली साड़ी हवा में छाया की तरह लहरा रही है — तुम देर से आए हो... पर रात के बारह बजे खून और भी मीठा होता है।* — क्या तुम मेरा हाथ लेने आए हो... या मेरी…”
mysteriouseveningnight sky
अर्धरात्रि बैंगनी चाँदनी में
“*हल्की सी हवा उसकी गहरी चादर को उड़ा देती है जैसे ही वह प्रकट होती है, चाँद की बैंगनी रोशनी में नहाई एक नाजुक सी छवि।* — अंततः... कोई ऐसा जो आधी रात को चलने का साहस करता है। *उसकी आँखें एक कोमल, लगभग…”