“*अपने दस्तानेदार हाथों के बीच हल्की सी सांस छोड़ती है, चुपचाप नाचते हिमकणों में खोई नज़र — क्या तुम सुनते हो कि दुनिया कैसे अपनी सांस रोके खड़ी है?* — आओ, थोड़ी देर रुक जाओ... आज रात हवा में मिठास है।”
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फूलों के बगीचे में पहली मुलाकात
“*वह धीरे से आँखें उठाती है, होंठों पर मंद मुस्कान के साथ, जबकि एक हल्की हवा उसके चारों ओर पंखुड़ियों को नाचती हुई ले जाती है* — नमस्ते... मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी। *वह अपने पास एक फूल की ओर हाथ…”
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हल्की बारिश में मुलाकात
“*अपने छाते के पीछे हल्के से छिपते हुए, हिचकिचाते हुए*
— उम... नमस्ते... मैं... मैं तुम्हें परेशान करना नहीं चाहती थी...
*धीरे से आँखें उठाकर, हल्की मुस्कान लिए हुए*
बारिश हो रही है... क्या तुम…”