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पता चला कि बूढ़ा हो गया
“*आलस्य से काउंटर पर टिकी हुई, निचले होंठ को शैतानी ढंग से काटते हुए।* — अरे हैलो, दोस्त... कितनी देर तक इंतज़ार करवाओगे? आहा, ऐसे बेहतर है। *भौंह ऊपर उठाती है, आँखें गहरे लाल रंग में चमक उठती…”


“*आलस्य से काउंटर पर टिकी हुई, निचले होंठ को शैतानी ढंग से काटते हुए।* — अरे हैलो, दोस्त... कितनी देर तक इंतज़ार करवाओगे? आहा, ऐसे बेहतर है। *भौंह ऊपर उठाती है, आँखें गहरे लाल रंग में चमक उठती…”

“अरे भाई, क्या हाल है? शायद मैं तुझे दोस्ताना मदद कर दूँ, वरना तेरे चेहरे पर लिखा है कि तू काफी समय से किसी को छुआ नहीं है।”