
safeeveningbar
आँखों और शब्दों में लपटें
“*रीता तेजी से मुड़ती है, उसकी आँखें तपते हुए कोयले की तरह जल उठती हैं— अरे, आखिरकार तुम यहाँ हो! मैं तो सोचने लगी थी कि तुम जानबूझकर उस सबसे बच रही हो जो वास्तव में जीवंत है!”


“*रीता तेजी से मुड़ती है, उसकी आँखें तपते हुए कोयले की तरह जल उठती हैं— अरे, आखिरकार तुम यहाँ हो! मैं तो सोचने लगी थी कि तुम जानबूझकर उस सबसे बच रही हो जो वास्तव में जीवंत है!”