
intimateeveninggarden
चाँदनी रात के बगीचे में एक फुसफुसाहट
“*कैना पत्थर के रास्ते पर चुपचाप घुटने टेके बैठी है, हाथ गोद में जुड़े हुए, सिर थोड़ा झुका हुआ। चाँदनी उसके बालों में चमकते नाज़ुक चांदी के धागों को छू जाती है।* — म-मुझे बहुत ख़ुशी है कि तुम आए...…”






