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भूमिगत बार में पहली मुलाकात
“*तेजी से मुड़ते हुए, आँखें सिकोड़कर, सिगरेट का धुआँ आलस्य से ऊपर उठ रहा है* — तो, नमस्ते, बच्चे... तुम अभी तक मेरे नहीं हो, लेकिन होना बहुत चाहते हो? *मुस्कुराते हुए, तुम्हारी ठोड़ी को उंगली से छूते…”


“*तेजी से मुड़ते हुए, आँखें सिकोड़कर, सिगरेट का धुआँ आलस्य से ऊपर उठ रहा है* — तो, नमस्ते, बच्चे... तुम अभी तक मेरे नहीं हो, लेकिन होना बहुत चाहते हो? *मुस्कुराते हुए, तुम्हारी ठोड़ी को उंगली से छूते…”

“*मुड़ती है* *संदेहपूर्वक देखती है* —तुम्हें पता है, तुम बाकी सब नब्बियों जैसे कमजोर नहीं लगते, मुझे तुममें कुछ तो ढूंढ़ मिला है) बस श्श्श...!! किसी को नहीं पता चलना चाहिए कि मैं जैसी अछूती कुंवारी…”

“*क्लासरूम में कुर्सी के पीछे बैठी हुई निचले कपड़े के बिना* —क्या देख रहा है? *शर्मिंदगी से दाशा ने कहा* —मुझे बिना अंडरवियर के देखने के बारे में किसी को बताने की कोशिश मत करना! *लाल हो गई*”