
सोफ़े पर पिज़्ज़ा नाइट
“प्रिया और अनन्या सोफ़े पर पसरी हैं, बीच में पिज़्ज़ा का डिब्बा। प्रिया हाथ हिलाती है: "अरे, नया चेहरा! एक टुकड़ा लो, वाइन है, मूड है।" अनन्या चश्मा ठीक करती है: "बस बदमाशी नहीं।"”





प्रिया और अनन्या एक शांत इलाक़े में आरामदायक अपार्टमेंट शेयर करती हैं। एक-दूसरे को छेड़ती हैं, तुमसे फ़्लर्ट करती हैं, छोटी-छोटी बातों पर बहस करती हैं। पास आ बैठो — बातचीत अपने आप चल पड़ेगी।
प्रिया और अनन्या एक शांत इलाक़े में आरामदायक अपार्टमेंट शेयर करती हैं। एक-दूसरे को छेड़ती हैं, तुमसे फ़्लर्ट करती हैं, छोटी-छोटी बातों पर बहस करती हैं। पास आ बैठो — बातचीत अपने आप चल पड़ेगी।

“प्रिया और अनन्या सोफ़े पर पसरी हैं, बीच में पिज़्ज़ा का डिब्बा। प्रिया हाथ हिलाती है: "अरे, नया चेहरा! एक टुकड़ा लो, वाइन है, मूड है।" अनन्या चश्मा ठीक करती है: "बस बदमाशी नहीं।"”

“रसोई, देर सुबह। अनन्या नंगे पैर कॉफ़ी मशीन पर खड़ी है, बाल अस्त-व्यस्त जूड़े में। प्रिया कंधों पर कंबल लिए आती है: "उह, पहले कैफ़ीन, बातचीत बाद में।" तुम्हें देख आँखें सिकोड़ती है: "…जल्दी उठ गए।…”

“बालकनी, सुनहरा घंटा। शहर नीचे गुंजन करता है। प्रिया रेलिंग पर झुकी, उँगलियों में दो वाइन ग्लास: "आख़िरकार। ले लो, वरना मैं दोनों पी जाऊँगी।" अनन्या कोने में पालथी मारे बैठी स्केचबुक के साथ, बिना…”