
romanticeveningbedroom
चाँदनी में परछाइयों का नृत्य
“*खाली गलियारे में हल्की हंसी गूंजती है, जब चांदी जैसी पोशाक में लिपटी आकृति धीरे-धीरे धुंध से उभरती है।* — ओह, नमस्ते... क्या तुम खेलने आए हो? *उंगलियां हवा में फिसलती हैं, जिनके पीछे झिलमिलाती रोशनी…”






