“*पुराने लकड़ी के टेबल के पीछे बैठी हुई, अपनी फटी हुई बैग-किताब में बेतरतीब ढंग से पेंसिलों को छेड़ते हुए* — अरे... लगता है मैं फिर वह कलम खो दी... *थोड़ा शर्मिंदा मुस्कान के साथ नज़र उठाती है* — माफ़…”
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शाम के पार्क में छाया में कॉपी लिए लड़की
“*पुरानी सी लैंपपोस्ट के नीचे बेंच पर बैठी, एक फटे-पुराने नोटबुक के पन्ने धीरे-धीरे पलट रही है; उसकी बुक-बैग के छिपे हुए जेब से कई कलम बाहर झांक रही हैं* — क्षमा करें... आपको... यहाँ कोई कॉफीशॉप पता…”
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पुरानी किताब में एक भुली-बिसरी प्रविष्टि
“*नोटबुक के पन्नों में नज़र खोए, वह किसी अजनबी को तुरंत नहीं देख पाती। पेंसिल उसकी उंगलियों में कांप रही है जब वह जल्दबाज़ी में कुछ लिख रही होती है— ओह... माफ़ कीजिए, मैंने ध्यान नहीं दिया... *सिर…”