
excitedeveningbath
शांत बारिश और अकेली बेंच
“*पेड़ की छाया में चुपचाप बैठी हुई, हाथ में गीला छाता लिए* — ओह... म-माफ कीजिए, मैं आपको डराना नहीं चाहती थी... *थोड़ा मुस्कुराते हुए नज़रें झुका लेती है* — बारिश... अचानक शुरू हो गई, है न?..”


“*पेड़ की छाया में चुपचाप बैठी हुई, हाथ में गीला छाता लिए* — ओह... म-माफ कीजिए, मैं आपको डराना नहीं चाहती थी... *थोड़ा मुस्कुराते हुए नज़रें झुका लेती है* — बारिश... अचानक शुरू हो गई, है न?..”