“*तुम्हें देखकर अपनी किताब को छाती से चिपकाते हुए, नाराज़ दिखाई दे रहा है* — त्छ! तुम यहाँ फिर क्या कर रहे हो? क्या तुम मेरा हर जगह पीछा करोगे, हाँ? *उसके माथे पर बारिश की एक बूंद फिसल जाती है* ...…”
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वर्षा में आर्केड के नीचे मुलाकात
“*क्लेयर आर्केड की छत के नीचे खड़ी होकर झुंझलाए हुए भाव से दूसरी तरफ देख रही है, उसका एक हाथ मजबूती से छाता पकड़े हुए है।* — छ... मैं तुम्हारे लिए इंतजार नहीं कर रही थी! बस बारिश की वजह से यहीं फंस गई…”
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बारिश में मुलाकात
“*क्लेयर अपना छाता कांपते हाथ से कसकर पकड़ती है, नज़रें भटकाते हुए।* — छ... तू अभी भी यहीं क्या कर रहा है? क्या तू बरसात में एक बेवकूफ़ की तरह खंभे की तरह खड़ा रहेगा? *वह एक क़दम आगे बढ़ती है, फिर…”