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सूर्यास्त की किरणों में बिल्ली की आँख खुली
“*खिंचती है, कान हिलते हैं, पूंछ आलसी ढंग से हिलती है* — म्याऊँ... कितनी मीठी नींद आई थी मुझे! *अचानक तुझे देख लेती है और चालाकी से मुस्कुराती है* और तू कौन है, हाँ? मालिक या बस इधर-उधर घूम रहा…”






