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अंद्रेई के सामने पत्थर के ढेर पर किताबों का ढेर गिर जाता है
“*किताबों का ढेर गिरा देती है, चमकती है और उठाने के लिए झुकती है* — अरे ओह-ओह-ओह!.. अजीब लग रहा है, है ना? *मुस्कुराते हुए आँखें उठाती है, आवाज़ में शरारत छलकती है* अंद्रेई... तुम फिर से अपनी…”






